23 साल की अंजलि सरदाना ने Pronto नाम का AI आधारित स्टार्टअप शुरू किया, जो मिनटों में मेड, कुक और क्लीनिंग सर्विस उपलब्ध कराता है। दो साल से कम समय में कंपनी 1700 करोड़ रुपये वैल्यूएशन तक पहुंच गई इस प्रकार -“सबसे बड़ी घरेलू परेशानी से खड़ी कर दी 1700 करोड़ की कंपनी, 23 साल की लड़की ने”

सबसे बड़ी घरेलू परेशानी से खड़ी कर दी 1700 करोड़ की कंपनी, 23 साल की लड़की ने
आज Pronto को घर के काम का क्विक कॉमर्स कहा जा रहा है। यह कहानी दिखाती है कि अगर समस्या की सही समझ हो और उसके समाधान के लिए नई सोच अपनाई जाए, तो छोटी उम्र में भी बड़ा बदलाव और बड़ी कंपनी बनाई जा सकती है।
जैसा कि भारत में घरों के काम के लिए मेड, कुक या सफाई करने वाले लोगों को ढूंढना हमेशा से मुश्किल काम माना जाता रहा है। ज्यादातर लोग जान-पहचान, पड़ोस या रिश्तेदारों के भरोसे ही किसी घरेलू मददगार को रखते थे। कई बार अचानक छुट्टी, भरोसे की कमी या समय पर मदद न मिलने जैसी परेशानियां भी सामने आती थीं। इसी रोजमर्रा की दिक्कत को 23 साल की अंजलि सरदाना ने एक बड़े बिजनेस आइडिया में बदल दिया। अंजलि ने 2025 में गुरुग्राम से Pronto की शुरुआत की। उनका मकसद साफ था, लोगों को मिनटों में भरोसेमंद हाउस हेल्प, कुक और क्लीनिंग सर्विस उपलब्ध कराना। आज यही स्टार्टअप तेजी से आगे बढ़ते हुए करोड़ों रुपये की कंपनी बन चुका है।
एक छोटे हब से शुरू होकर कई शहरों तक पहुंची कंपनी
Pronto की शुरुआत सिर्फ एक हब से हुई थी। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि कुछ ही महीनों में यह स्टार्टअप इतनी तेजी से बढ़ जाएगा। लेकिन लोगों की जरूरत और तेज सर्विस ने कंपनी को बहुत जल्दी लोकप्रिय बना दिया। दिसंबर के दौरान कंपनी के पास रोज करीब 3000 बुकिंग आ रही थीं। अब यह संख्या बढ़कर 26000 से ज्यादा प्रतिदिन पहुंच चुकी है। यह ग्रोथ दिखाती है कि शहरों में ऑन डिमांड घरेलू सर्विस की मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है। अब कंपनी कई शहरों तक अपना नेटवर्क बढ़ा चुकी है और लगातार विस्तार पर काम कर रही है।नीचे समझते हैं कैसे काम करता है Pronto.
कैसे काम करता है Pronto का सिस्टम
Pronto का मॉडल काफी हद तक क्विक कॉमर्स कंपनियों जैसा है। जैसे लोग खाने या किराने का सामान मिनटों में मंगाते हैं, वैसे ही यह प्लेटफॉर्म घर के काम के लिए तुरंत मदद पहुंचाने की कोशिश करता है। कंपनी का ऐप AI और स्मार्ट एल्गोरिद्म के जरिए यह तय करता है कि किस इलाके में कौन सा वर्कर सबसे जल्दी ग्राहक तक पहुंच सकता है। इसी वजह से लोगों को लंबे इंतजार की जरूरत नहीं पड़ती।
Pronto का पूरा सिस्टम हाइपरलोकल AI मॉडल पर आधारित बताया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि हर इलाके की डिमांड, ट्रैफिक, उपलब्ध वर्कर्स और समय को ध्यान में रखकर सर्विस दी जाती है। इससे ग्राहक को तेज और आसान अनुभव मिलता है।
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सिर्फ सुविधा नहीं, सुरक्षा पर भी जोर
घरेलू कामकाज से जुड़ी सबसे बड़ी चिंता भरोसे और सुरक्षा की होती है। इसी वजह से Pronto ने अपने प्लेटफॉर्म पर कई सुरक्षा फीचर जोड़े हैं। कंपनी घरेलू कामगारों का बैकग्राउंड चेक कराती है। इसके अलावा उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाती है ताकि ग्राहकों को बेहतर सर्विस मिल सके। प्लेटफॉर्म में SOS फीचर भी जोड़ा गया है, जिससे इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। कई महिला वर्कर्स को सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इससे कंपनी सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि कामगारों की सुरक्षा और आत्मविश्वास पर भी ध्यान देती दिखाई देती है।
अंजलि सरदाना का बड़ा विजन
अंजलि सरदाना का कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ लोगों को सुविधा देना नहीं है। वे चाहती हैं कि घरेलू कामगारों को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थिर रोजगार भी मिले। भारत में लाखों लोग घरेलू काम करके अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं, लेकिन इस सेक्टर में लंबे समय तक कोई संगठित सिस्टम नहीं था। Pronto इसी अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर को टेक्नोलॉजी के जरिए व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा है।
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20 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग से बढ़ी चर्चा
Pronto ने हाल ही में 20 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग जुटाई है। इस निवेश के बाद कंपनी की वैल्यूएशन करीब 1700 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इतनी कम उम्र में किसी फाउंडर द्वारा इतनी तेजी से बड़ा बिजनेस खड़ा करना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। स्टार्टअप जगत में भी Pronto को भारत के सबसे तेजी से बढ़ते नए प्लेटफॉर्म्स में गिना जा रहा है। निवेशकों का मानना है कि आने वाले समय में घरेलू सर्विस सेक्टर में टेक्नोलॉजी आधारित मॉडल और तेजी से बढ़ सकते हैं।
क्यों खास मानी जा रही है यह सफलता
अंजलि सरदाना की कहानी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने बहुत कम उम्र में ऐसी समस्या को पहचाना, जिससे करोड़ों लोग रोज जूझते हैं। फिर टेक्नोलॉजी, AI और तेज सर्विस को जोड़कर उन्होंने ऐसा मॉडल तैयार किया, जिसने कम समय में लोगों का ध्यान खींच लिया।